साथ ही मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पटना सहित राज्य के कई हिस्सों में आज बारिश होने की संभावना है। अख़बार में यह भी बताया गया है कि हाल ही में ठनका (बिजली गिरने) से राज्य में चार लोगों की मौत हो चुकी है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षा बरतने की सलाह दी है।
सबसे बड़ी खबर यह है कि बिहार में आंधी-वज्रपात ने 58 लोगों की जान ले ली। कई जगह पेड़, दीवार और बिजली के खंभे गिरने से हादसे हुए।
नालंदा में 22 समेत 35 लोगों की मौत पेड़-दीवार गिरने से हुई।
मौसम विभाग ने अगले 12 घंटे तक तेज़ हवा और बारिश की चेतावनी जारी की है।
देश के 24 जिलों में 60 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से चली हवाओं ने मचाई तबाही, मूसलाधार बारिश भी हुई
खेत से लेकर खलिहान तक रबी फसलों को भारी नुकसान, आम और सब्ज़ियों की फसल भी बर्बाद
मोतिहारी और बक्सर में यूपी को जोड़ने वाले गंगा पर बने पीपा पुल टूटे, रेल और हवाई सेवा भी प्रभावित
वैज्ञानिकों ने पहली बार वैश्विक स्तर पर बिजली गिरने से पेड़ों की मौत का आंकड़ा जुटाया है।
उनके अनुसार हर साल दुनिया भर में लगभग 32 करोड़ पेड़ बिजली गिरने से नष्ट हो जाते हैं।
यह अध्ययन इस बात पर भी जोर देता है कि बिजली गिरने की घटनाएं जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रही हैं और इससे न केवल जंगल बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र भी प्रभावित हो रहा है।
भारत में भी इसका असर देखा जा रहा है। बढ़ते तापमान, बदलते मौसम और बिजली गिरने की घटनाओं की संख्या में वृद्धि ने जंगलों के लिए खतरा पैदा कर दिया है।
रिपोर्ट बताती है कि 2020 से 2024 के बीच भारत में बिजली गिरने की घटनाएं 34% तक बढ़ी हैं।
कोलकाता की आईआईटी और अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध के मुताबिक, बिजली गिरने की घटनाओं में बिहार देश में सबसे अधिक प्रभावित राज्य बनकर उभरा है। खासकर दक्षिणी बिहार के मैदानी इलाकों में आंधी-तूफान और वज्रपात की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022-23 में राज्य में 400 से ज्यादा लोगों की मौत वज्रपात से हुई। मौसम विभाग का कहना है कि ऐसे हालात में 15-45 मिनट पहले चेतावनी जारी कर दी जाती है, लेकिन सतर्कता और बचाव उपाय अपनाना जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि
भूमि का समतल होना,
गंगा के मैदानी इलाकों में गर्मी और नमी से वायुमंडलीय अस्थिरता,
और वैश्विक जलवायु परिवर्तन
तेज आंधी-तूफान और वज्रपात के प्रमुख कारण हैं।
सरकार और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बिजली गिरने की चेतावनी मिलते ही खुले स्थान, खेत या पेड़ों के नीचे जाने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर शरण लें। समय पर सावधानी बरतने से जान-माल के नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।
बिहार में रविवार को मौसम की मार ने कहर बरपाया। अलग-अलग जिलों में वज्रपात की घटनाओं में नौ लोगों की मौत हो गई, जबकि आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलस गए। सबसे ज्यादा नुकसान बांका, गया, नालंदा और वैशाली जिलों में हुआ, जहां खेतों में काम कर रहे किसानों, पशुपालकों और कांवरियों को बिजली गिरने से जान गंवानी पड़ी। बांका के अमरपुर, फुल्लीडुमर, बेलहर व अन्य क्षेत्रों में कई लोग झुलस गए। सिवान, नालंदा और चकिया गांव में भी किशोरियों व बुजुर्गों की मौत हुई। मौसम विभाग ने लोगों को खेतों और खुले क्षेत्रों में सतर्क रहने की अपील की है।
आपदा: राज्य के सात जिलों में बरपा कहर, 13 झुलसे
बिहार में वज्रपात से 20 लोगों की मौत
पटना / संवाददाता, हिंदुस्तान
तेज हवा के साथ बारिश हुई।
राज्य के सात जिलों में बिजली गिरने से 20 लोगों की मौत और 13 अन्य झुलस गए। गया, जमुई, नवादा, औरंगाबाद, रोहतास, बक्सर और कैमूर जिलों में सबसे ज्यादा प्रभाव रहा।
सरकार ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने का आदेश दिया है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अधिकारियों को राहत देने के निर्देश दिए।
मुख्य बातें:
गया जिले में 68 वर्षीय महिला और 52 वर्षीय पुरुष सहित कई लोगों की मौत।
जमुई में 47 वर्षीय महिला और 21 वर्षीय महिला सहित मौतें।
औरंगाबाद, नवादा, रोहतास और कैमूर में भी वज्रपात से जानें गईं।
सरकारी आदेश:
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चार-चार लाख मुआवजा का आदेश दिया।
आल अधिकारियों को आपदा प्रभावित इलाकों में त्वरित राहत पहुंचाने का निर्देश।